Jaꞑalif
| Lateinisches Schriftsystem | ||||
|---|---|---|---|---|
| Schrifttyp | Alphabetschrift | |||
| Sprachen | Turksprachen Persisch Nordkaukasische Mongolische Finno-ugrische Tunguso-Mandschusische Paläoasiatische | |||
| Verwendungszeit | 1928 – 1940 | |||
| Verwendet in | UdSSR, Mongolische Volksrepublik und Tuwinische Volksrepublik | |||
| Abstammung | Phönizische Schrift → Griechisches Alphabet → Etruskische Schrift → Lateinisches Alphabet → Lateinisches Schriftsystem | |||
| Verwandte | Kyrillisches Alphabet Koptische Schrift Armenisches Alphabet | |||
| Besonderheiten | von links nach rechts | |||
Einheitliches neues turksprachiges Alphabet | ||||
| Nr. | Zeichen | Yaña imlâ basierend auf arab. Buchstaben | latinisierte Version | kyrillische Version (Tatarisch) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | A a | ﯪ | A a | А а |
| 2 | B ʙ | ﺏ | B b | Б б |
| 3 | C c | ﭺ | Ç ç | Ч ч |
| 4 | Ç ç | ﺝ | C c | Җ җ |
| 5 | D d | ﺩ | D d | Д д |
| 6 | E e | ﺋ | E e | Е е (э) |
| 7 | Ə ə | ﺋﻪ | Ä ä | Ә ә |
| 8 | F f | ﻑ | F f | Ф ф |
| 9 | G g | ﮒ | G g | Г г (гь) |
| 10 | Ƣ ƣ | ﻉ | Ğ ğ | Г г (гъ) |
| 11 | H h | ﻩ | H h | Һ һ |
| 12 | I i | ئی | İ i | И и |
| 13 | J j | ﻯ | Y y | Й й |
| 14 | K k | ﮎ | K k | К к (кь) |
| 15 | L l | ﻝ | L l | Л л |
| 16 | M m | ﻡ | M m | М м |
| 17 | N n | ﻥ | N n | Н н |
| 18 | Ꞑ ꞑ | ﯓ | Ñ ñ | Ң ң |
| 19 | O o | ﯰ, | O o | О о |
| 20 | Ɵ ɵ | ﯰ | Ö ö | Ө ө |
| 21 | P p | ﭖ | P p | П п |
| 22 | Q q | ﻕ | Q q | К к (къ) |
| 23 | R r | ﺭ | R r | Р р |
| 24 | S s | ﺱ | S s | С с |
| 25 | Ş ş | ﺵ | Ş ş | Ш ш |
| 26 | T t | ﺕ | T t | Т т |
| 27 | U u | ﯮ, | U u | У у |
| 28 | V v | ﻭ | W w | В в (в, у) |
| 29 | X x | ﺡ | X x | Х х |
| 30 | У y | ﯮ | Ü ü | Ү ү |
| 31 | Z z | ﺯ | Z z | З з |
| 32 | Ƶ ƶ | ﮊ | J j | Ж ж |
| 33 | ﺋ, | I ı | Ы ы | |
| (34.1) | ' | ء | ' | ъ, ь, э |
| (34.2) | ئی, | (Í í) | ый |
Der Übergang zum Kyrillischen (1938–1940)
[Bearbeiten | Quelltext bearbeiten]1939 begann die vollständige Kyrillisierung der nationalen Literatur der UdSSR. Wie angekündigt, erfolgte der Wechsel des lateinischen zum kyrillischen Alphabet „auf Wunsch der Arbeiter“.
Versuche, Jaꞑalif für die tatarische Sprache wiederzubeleben (Anfang der 1990er Jahre)
[Bearbeiten | Quelltext bearbeiten]In den 1990er Jahren wurde in Tatarstan versucht, Jaꞑalif mit dem Buchstaben W wiederzubeleben, um die tatarische Phonetik besser wiederzugeben. Die Versuche scheiterten jedoch an einer Reihe technischer Probleme, insbesondere aufgrund fehlender Lettern in Druckereien und der nicht vorhandenen Freigabe von Jaꞑalif. Im Jahr 2000 wurde in Tatarstan eine neue Version des lateinischen Alphabets nahe dem modernen türkischen Alphabet angenommen, das jedoch 2002 durch einen Beschluss des Verfassungsgerichts der Russischen Föderation für den offiziellen Gebrauch verboten wurde.[1]
Siehe auch
[Bearbeiten | Quelltext bearbeiten]Weblinks
[Bearbeiten | Quelltext bearbeiten]Einzelnachweise
[Bearbeiten | Quelltext bearbeiten]- ↑ Мирфатых З. Закиев: Тюрко-татарское письмо (история, состояние и перспективы). Инсан, Moskau 2005, ISBN 5-85840-330-1.

